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श्लोक 1.97.24  |
वैशम्पायन उवाच
एवं संदिश्य तनयं प्रतीप: शान्तनुं तदा।
स्वे च राज्येऽभिषिच्यैनं वनं राजा विवेश ह॥ २४॥ |
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| अनुवाद |
| वैशम्पायन कहते हैं - अपने पुत्र शान्तनु को ऐसी आज्ञा देकर राजा प्रतीप ने तुरन्त ही उसे अपने राज्य का राजा अभिषिक्त कर दिया और स्वयं वन में प्रवेश कर गए॥ 24॥ |
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| Vaishmpayana says - Having given such orders to his son Shantanu, King Pratipa immediately anointed him as the king of his kingdom and himself entered the forest.॥ 24॥ |
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