Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.97.19-20: अपने पुण्यकर्मों से प्राप्त अक्षय पुण्यलोकों का स्मरण करते हुए, कुरुश्रेष्ठ शान्तनु सदैव पुण्यकर्मों के अनुष्ठान में तत्पर रहते थे। राजा प्रतीप ने वयस्क हुए राजकुमार शान्तनु को आदेश दिया—॥19-20॥ | mahabharat अध्याय 1.97: राजा प्रतीपका गंगाको पुत्रवधूके रूपमें स्वीकार करना और शान्तनुका जन्म, राज्याभिषेक तथा गंगासे मिलना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अपने पुण्यकर्मों से प्राप्त अक्षय पुण्यलोकों का स्मरण करते हुए, कुरुश्रेष्ठ शान्तनु सदैव पुण्यकर्मों के अनुष्ठान में तत्पर रहते थे। राजा प्रतीप ने वयस्क हुए राजकुमार शान्तनु को आदेश दिया—॥19-20॥
Remembering the inexhaustible virtuous worlds acquired by his good deeds, Shantanu, the best of the Kurus, always remained engaged in the rituals of virtuous deeds. King Pratipa ordered Prince Shantanu, who had reached adulthood—॥ 19-20॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥