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mahabharat 1.97.12: स्त्री बोली- हे धर्मात्मा राजा! आप जो कहते हैं, वह हो सकता है। मैं आपके पुत्र से संयुक्त हो जाऊँगी। आपकी भक्ति के कारण मैं प्रसिद्ध भरतवंश की सेवा करूँगी॥ 12॥   |   mahabharat अध्याय 1.97: राजा प्रतीपका गंगाको पुत्रवधूके रूपमें स्वीकार करना और शान्तनुका जन्म, राज्याभिषेक तथा गंगासे मिलना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 97: राजा प्रतीपका गंगाको पुत्रवधूके रूपमें स्वीकार करना और शान्तनुका जन्म, राज्याभिषेक तथा गंगासे मिलना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  1.97.12 
स्त्र्युवाच
एवमप्यस्तु धर्मज्ञ संयुज्येयं सुतेन ते।
त्वद्भक्त्या तु भजिष्यामि प्रख्यातं भारतं कुलम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
स्त्री बोली- हे धर्मात्मा राजा! आप जो कहते हैं, वह हो सकता है। मैं आपके पुत्र से संयुक्त हो जाऊँगी। आपकी भक्ति के कारण मैं प्रसिद्ध भरतवंश की सेवा करूँगी॥ 12॥
 
The woman said— O righteous king! What you say can happen. I will be united with your son. Because of my devotion towards you, I will serve the famous Bharat dynasty.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)