Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.96.6-7: तब ब्रह्माजी ने महाभिषक को शाप देकर कहा - 'दुर्मते! तुम मनुष्यों में जन्म लेकर पवित्र लोकों में आओगे। जिस गंगा ने तुम्हारा मन हर लिया है, वही मनुष्य लोक में तुम्हारे विरुद्ध आचरण करेगी।' 6-7॥ | mahabharat अध्याय 1.96: महाभिषको ब्रह्माजीका शाप तथा शापग्रस्त वसुओंके साथ गंगाकी बातचीत । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सोऽपध्यातो भगवता ब्रह्मणा तु महाभिष:।
उक्तश्च जातो मर्त्येषु पुनर्लोकानवाप्स्यसि॥ ६॥
ययाऽऽहृतमनाश्चासि गङ्गया त्वं हि दुर्मते।
सा ते वै मानुषे लोके विप्रियाण्याचरिष्यति॥ ७॥
अनुवाद
तब ब्रह्माजी ने महाभिषक को शाप देकर कहा - 'दुर्मते! तुम मनुष्यों में जन्म लेकर पवित्र लोकों में आओगे। जिस गंगा ने तुम्हारा मन हर लिया है, वही मनुष्य लोक में तुम्हारे विरुद्ध आचरण करेगी।' 6-7॥
Then Lord Brahma cursed Mahabhishka and said – 'Durmate! You will take birth among humans and then come to the holy worlds. The same Ganga who has stolen your mind will behave against you in the human world. 6-7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥