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mahabharat 1.96.21: वसुओं ने कहा, "हम सब अपने तेज का आठवाँ भाग देंगे। उस तेज से जो पुत्र उत्पन्न होगा, वह उस राजा की इच्छानुसार होगा।"   |   mahabharat अध्याय 1.96: महाभिषको ब्रह्माजीका शाप तथा शापग्रस्त वसुओंके साथ गंगाकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 96: महाभिषको ब्रह्माजीका शाप तथा शापग्रस्त वसुओंके साथ गंगाकी बातचीत  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.96.21 
वसव ऊचु:
तुरीयार्धं प्रदास्यामो वीर्यस्यैकैकशो वयम्।
तेन वीर्येण पुत्रस्ते भविता तस्य चेप्सित:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
वसुओं ने कहा, "हम सब अपने तेज का आठवाँ भाग देंगे। उस तेज से जो पुत्र उत्पन्न होगा, वह उस राजा की इच्छानुसार होगा।"
 
The Vasus said, "We will all give one eighth of our radiance. The one son born from that radiance will be as per the wish of that king."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)