Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.96.15: 'ब्रह्म के अनुयायी उन ऋषि ने जो कहा है, वह अस्वीकार नहीं किया जा सकता; इसलिए हम आपसे प्रार्थना करते हैं कि आप पृथ्वी पर मनुष्य पत्नी बनकर हम वसुओं को अपने पुत्रों के रूप में उत्पन्न करें॥ 15॥ | mahabharat अध्याय 1.96: महाभिषको ब्रह्माजीका शाप तथा शापग्रस्त वसुओंके साथ गंगाकी बातचीत । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'ब्रह्म के अनुयायी उन ऋषि ने जो कहा है, वह अस्वीकार नहीं किया जा सकता; इसलिए हम आपसे प्रार्थना करते हैं कि आप पृथ्वी पर मनुष्य पत्नी बनकर हम वसुओं को अपने पुत्रों के रूप में उत्पन्न करें॥ 15॥
'What that sage who is a follower of Brahman has said cannot be denied; therefore, we request you to become a human wife on Earth and produce us Vasus as your sons.॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥