Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.95.61: 'देवियों! मुझे यह शाप मेरी चंचलता के कारण मिला है। मैंने सुना है कि संतानहीन लोग पुण्यलोक को प्राप्त नहीं करते। अतः तुम मेरे लिए एक पुत्र उत्पन्न करो।' उन्होंने कुंती से ऐसा कहा। उनके ऐसा कहने पर कुंती ने तीन पुत्र उत्पन्न किए - धर्मराज से युधिष्ठिर, वायुदेव से भीमसेन और इंद्र से अर्जुन। 61.   |   mahabharat अध्याय 1.95: दक्ष प्रजापतिसे लेकर पूरुवंश, भरतवंश एवं पाण्डुवंशकी परम्पराका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 95: दक्ष प्रजापतिसे लेकर पूरुवंश, भरतवंश एवं पाण्डुवंशकी परम्पराका वर्णन  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  1.95.61 
स्वचापल्यादिदं प्राप्तवानहं शृणोमि च नानपत्यस्य लोका: सन्तीति। सा त्वं मदर्थे पुत्रानुत्पादयेति कुन्तीमुवाच। सा तथोक्ता पुत्रानुत्पादयामास। धर्माद् युधिष्ठिरं मारुताद् भीमसेनं शक्रादर्जुनमिति॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
'देवियों! मुझे यह शाप मेरी चंचलता के कारण मिला है। मैंने सुना है कि संतानहीन लोग पुण्यलोक को प्राप्त नहीं करते। अतः तुम मेरे लिए एक पुत्र उत्पन्न करो।' उन्होंने कुंती से ऐसा कहा। उनके ऐसा कहने पर कुंती ने तीन पुत्र उत्पन्न किए - धर्मराज से युधिष्ठिर, वायुदेव से भीमसेन और इंद्र से अर्जुन। 61.
 
'Ladies! I have received this curse because of my fickleness. I have heard that those without children do not attain the world of virtues. Therefore, you produce a son for me.' He said this to Kunti. On his saying this, Kunti produced three sons - Yudhishthira from Dharmaraj, Bhimasena from Vayudev and Arjuna from Indra. 61.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)