Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.95.59: एक दिन, शिकार खेलते समय, राजा पांडु ने एक हिरण रूपी ऋषि को अपनी पत्नी, जो हिरणी का रूप धारण कर चुकी थी, के साथ संभोग करते देखा। उस अद्भुत हिरण ने अभी तक प्रेम-अमृत का स्वाद नहीं चखा था। राजा ने उसे तब तक बाण से मार डाला जब तक वह तृप्त नहीं हो गया था। | mahabharat अध्याय 1.95: दक्ष प्रजापतिसे लेकर पूरुवंश, भरतवंश एवं पाण्डुवंशकी परम्पराका वर्णन । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अथ पाण्डुर्मृगयां चरन् मैथुनगतमृषिमपश्यन्मृग्यां वर्तमानम्। तथैवाद्भुतमनासादितकामरसमतृप्तं च बाणेनाजघान॥ ५९॥
अनुवाद
एक दिन, शिकार खेलते समय, राजा पांडु ने एक हिरण रूपी ऋषि को अपनी पत्नी, जो हिरणी का रूप धारण कर चुकी थी, के साथ संभोग करते देखा। उस अद्भुत हिरण ने अभी तक प्रेम-अमृत का स्वाद नहीं चखा था। राजा ने उसे तब तक बाण से मार डाला जब तक वह तृप्त नहीं हो गया था।
One day, while hunting, King Pandu saw a sage in the form of a deer having sex with his wife who had taken the form of a doe. That wonderful deer had not yet tasted the nectar of love. The king killed it with an arrow while it was still unsatisfied.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥