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श्री महाभारत
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पर्व 1: आदि पर्व
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अध्याय 95: दक्ष प्रजापतिसे लेकर पूरुवंश, भरतवंश एवं पाण्डुवंशकी परम्पराका वर्णन
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श्लोक 58
श्लोक
1.95.58
पाण्डोस्तु द्वे भार्ये बभूवतु: कुन्ती पृथा नाम माद्री च इत्युभे स्त्रीरत्ने॥ ५८॥
अनुवाद
पाण्डुकी की दो पत्नियाँ थीं - कुन्तिभोज की पुत्रियाँ पृथा और माद्री । ये दोनों स्त्रियाँ रत्नों के समान रूप वाली थीं ॥58॥
Panduki had two wives; Kuntibhoja's daughters Pritha and Madri. Both of these women had the form of gems. 58॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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