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mahabharat 1.95.56: उनमें व्यासजी के वरदान से गांधारी के गर्भ से राजा धृतराष्ट्र के सौ पुत्र हुए ॥56॥   |   mahabharat अध्याय 1.95: दक्ष प्रजापतिसे लेकर पूरुवंश, भरतवंश एवं पाण्डुवंशकी परम्पराका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 95: दक्ष प्रजापतिसे लेकर पूरुवंश, भरतवंश एवं पाण्डुवंशकी परम्पराका वर्णन  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  1.95.56 
तत्र धृतराष्ट्रस्य राज्ञ: पुत्रशतं बभूव गान्धार्यां वरदानाद् द्वैपायनस्य॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
उनमें व्यासजी के वरदान से गांधारी के गर्भ से राजा धृतराष्ट्र के सौ पुत्र हुए ॥56॥
 
Among them, King Dhritarashtra had hundred sons from the womb of Gandhari due to the boon given by Vyasji. 56॥ ,
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)