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mahabharat 1.95.53: उसने मन ही मन महर्षि व्यास का स्मरण किया, तब व्यासजी उसके समक्ष प्रकट हुए और बोले - 'क्या आज्ञा है?'॥53॥   |   mahabharat अध्याय 1.95: दक्ष प्रजापतिसे लेकर पूरुवंश, भरतवंश एवं पाण्डुवंशकी परम्पराका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 95: दक्ष प्रजापतिसे लेकर पूरुवंश, भरतवंश एवं पाण्डुवंशकी परम्पराका वर्णन  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  1.95.53 
सा द्वैपायनमृषिं मनसा चिन्तयामास। स तस्या: पुरत: स्थित:, किं करवाणीति॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
उसने मन ही मन महर्षि व्यास का स्मरण किया, तब व्यासजी उसके समक्ष प्रकट हुए और बोले - 'क्या आज्ञा है?'॥53॥
 
He thought of Maharshi Vyasa in his mind. Then Vyasa appeared before him and said, 'What is your command?'॥ 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)