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mahabharat 1.95.46: शान्तनु के विषय में यह श्लोक मिलता है - जिस किसी वृद्ध व्यक्ति को वे अपने दोनों हाथों से स्पर्श करते, वह अत्यन्त प्रसन्न और शान्त हो जाता और पुनः युवा हो जाता। इसी कारण लोग उन्हें शान्तनु के नाम से जानने लगे। इसी कारण उनका नाम शान्तनु पड़ा॥ 46॥   |   mahabharat अध्याय 1.95: दक्ष प्रजापतिसे लेकर पूरुवंश, भरतवंश एवं पाण्डुवंशकी परम्पराका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 95: दक्ष प्रजापतिसे लेकर पूरुवंश, भरतवंश एवं पाण्डुवंशकी परम्पराका वर्णन  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  1.95.46 
अत्रानुवंशश्लोको भवति—
यं यं कराभ्यां स्पृशति जीर्णं स सुखमश्नुते।
पुनर्युवा च भवति तस्मात् तं शान्तनुं विदु:॥
इति तदस्य शान्तनुत्वम्॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
शान्तनु के विषय में यह श्लोक मिलता है - जिस किसी वृद्ध व्यक्ति को वे अपने दोनों हाथों से स्पर्श करते, वह अत्यन्त प्रसन्न और शान्त हो जाता और पुनः युवा हो जाता। इसी कारण लोग उन्हें शान्तनु के नाम से जानने लगे। इसी कारण उनका नाम शान्तनु पड़ा॥ 46॥
 
This verse is available about Shantanu - Whichever old person he touched with both his hands, he would feel very happy and peaceful and would become young again. That is why people started knowing him as Shantanu. This is the reason why he was named Shantanu.॥ 46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)