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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 95: दक्ष प्रजापतिसे लेकर पूरुवंश, भरतवंश एवं पाण्डुवंशकी परम्पराका वर्णन  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  1.95.32 
ततोऽस्य भरतत्वम्। भरत: खलु काशेयीमुपयेमे सार्वसेनीं सुनन्दां नाम। तस्यामस्य जज्ञे भुमन्यु:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
आकाशवाणी हुई कि उसे जीविका दी जाएगी, इसलिए उस बालक का नाम भरत रखा गया। भरत ने राजा सर्वसेन की पुत्री सुनंदा से विवाह किया, जो काशी की राजकुमारी थीं। उनके गर्भ से भरत को भूमन्यु नामक पुत्र की प्राप्ति हुई।
 
The voice from the sky had said that he would be given sustenance, so the boy was named Bharat. Bharat married Sunanda, daughter of King Sarvasena. She was the princess of Kashi. From her womb Bharat had a son named Bhumanyu.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)