vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 1: आदि पर्व
»
अध्याय 95: दक्ष प्रजापतिसे लेकर पूरुवंश, भरतवंश एवं पाण्डुवंशकी परम्पराका वर्णन
»
श्लोक 17
श्लोक
1.95.17
जयत्सेनो खलु वैदर्भीमुपयेमे सुश्रवां नाम। तस्यामस्य जज्ञे अवाचीन:॥ १७॥
अनुवाद
जयत्सेन ने विदर्भ की राजकुमारी सुश्रवा से विवाह किया। उसके गर्भ से उन्हें अवचिन नामक पुत्र की प्राप्ति हुई।
Jayatsena married Vidarbha princess Sushravas. From her womb he had a son named Avachin.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×