श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 94: पूरुवंशका वर्णन  »  श्लोक 52-53
 
 
श्लोक  1.94.52-53 
अविक्षित: परिक्षित् तु शबलाश्वस्तु वीर्यवान्।
आदिराजो विराजश्च शाल्मलिश्च महाबल:॥ ५२॥
उच्चै:श्रवा भङ्गकारो जितारिश्चाष्टम: स्मृत:।
एतेषामन्ववाये तु ख्यातास्ते कर्मजैर्गुणै:।
जनमेजयादय: सप्त तथैवान्ये महारथा:॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
अश्ववान का दूसरा नाम अविक्षित था। उसके आठ पुत्र हुए, जिनके नाम इस प्रकार हैं - परीक्षित, महाबली शबलश्व, आदिराज, विराज, महाबली शाल्मलि, उच्चैश्रवा, भंगकर और आठवाँ जितारि। उसके वंश में जनमेजय आदि सात अन्य महारथी हुए, जो अपने कर्मजन्य गुणों के कारण प्रसिद्ध हैं। 52-53॥
 
Another name of Ashwavan was Avikshit. He had eight sons, whose names are as follows – Parikshit, mighty Shablashva, Adiraj, Viraj, mighty Shalmali, Ucchaishrava, Bhangakar and the eighth Jitari. In his lineage, there were seven other great warriors like Janamejaya etc., who are famous for their work-born qualities. 52-53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)