Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.94.50-51: उन महातपस्वी कुरु ने अपनी तपस्या के बल से कुरुक्षेत्र को पवित्र किया। उनके पाँच पुत्र सुने गए हैं - अश्ववान, अभिष्यंत, चैत्ररथ, मुनि और प्रसिद्ध जनमेजय। ये पाँचों पुत्र उनकी प्रिय पत्नी वाहिनी से उत्पन्न हुए। 50-51॥ | mahabharat अध्याय 1.94: पूरुवंशका वर्णन । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कुरुक्षेत्रं स तपसा पुण्यं चक्रे महातपा:।
अश्ववन्तमभिष्यन्तं तथा चैत्ररथं मुनिम्॥ ५०॥
जनमेजयं च विख्यातं पुत्रांश्चास्यानुशुश्रुम।
पञ्चैतान् वाहिनी पुत्रान् व्यजायत मनस्विनी॥ ५१॥
अनुवाद
उन महातपस्वी कुरु ने अपनी तपस्या के बल से कुरुक्षेत्र को पवित्र किया। उनके पाँच पुत्र सुने गए हैं - अश्ववान, अभिष्यंत, चैत्ररथ, मुनि और प्रसिद्ध जनमेजय। ये पाँचों पुत्र उनकी प्रिय पत्नी वाहिनी से उत्पन्न हुए। 50-51॥
That great ascetic Kuru made Kurukshetra sacred by the power of his penance. His five sons have been heard - Ashwavan, Abhishyant, Chaitraratha, Muni and the famous Janamejaya. These five sons were given birth to his loving wife Vahini. 50-51॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥