श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 94: पूरुवंशका वर्णन  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  1.94.29 
चैत्ययूपाङ्किता चासीद् भूमि: शतसहस्रश:।
प्रवृद्धजनसस्या च सर्वदैव व्यरोचत॥ २९॥
 
 
अनुवाद
उनके राज्य की भूमि लाखों चैत्यों (मंदिरों) और यज्ञों से युक्त थी। सभी लोग स्वस्थ और बलवान थे। कृषि उपज बहुत अधिक थी। इस प्रकार उनके राज्य की भूमि सदैव वैभव से सुशोभित रहती थी।
 
The land of his kingdom was marked with lakhs of Chaityas (temples) and Yagyaupas. All the people were healthy and strong. The agricultural produce was high. Thus the land of his kingdom was always adorned with its splendor.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)