Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.93.d8-d9: माधवी बोली - पुत्रो! तुम सब लोग मिलकर सुनो - 'ये मेरे पिता नहुषनंदन महाराज ययाति हैं। ये मेरे पुत्रों के यशस्वी नाना हैं। इन्होंने मेरे भाई पुरु को राजा बनाकर स्वर्ग की यात्रा की थी; किन्तु किसी अज्ञात कारण से ये यशस्वी राजा पुनः यहाँ आ गए हैं।' | mahabharat अध्याय 1.93: राजा ययातिका वसुमान् और शिबिके प्रतिग्रहको अस्वीकार करना तथा अष्टक आदि चारों राजाओंके साथ स्वर्गमें जाना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
माधव्युवाच
शृणुध्वं सहिता: पुत्रा नाहुषोऽयं पिता मम।
ययातिर्मम पुत्राणां मातामह इति श्रुत:॥
पूरुं मे भ्रातरं राज्ये समावेश्य दिवं गत:।
केन वा कारणेनैव इह प्राप्तो महायशा:॥
अनुवाद
माधवी बोली - पुत्रो! तुम सब लोग मिलकर सुनो - 'ये मेरे पिता नहुषनंदन महाराज ययाति हैं। ये मेरे पुत्रों के यशस्वी नाना हैं। इन्होंने मेरे भाई पुरु को राजा बनाकर स्वर्ग की यात्रा की थी; किन्तु किसी अज्ञात कारण से ये यशस्वी राजा पुनः यहाँ आ गए हैं।'
Madhavi said - Sons! All of you listen together - 'This is my father Nahushanandan Maharaj Yayati. He is the famous maternal grandfather of my sons. He had anointed my brother Puru as the king and travelled to heaven; but for some unknown reason this very famous king has come here again'.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥