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mahabharat 1.93.d4: माधवी बहुत प्रसन्न हुई जब उसने यज्ञ वेदी के चारों ओर भ्रमण किया, अपने अजेय पुत्रों को देखा और यज्ञ की महिमा का अनुभव किया।   |   mahabharat अध्याय 1.93: राजा ययातिका वसुमान् और शिबिके प्रतिग्रहको अस्वीकार करना तथा अष्टक आदि चारों राजाओंके साथ स्वर्गमें जाना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 93: राजा ययातिका वसुमान् और शिबिके प्रतिग्रहको अस्वीकार करना तथा अष्टक आदि चारों राजाओंके साथ स्वर्गमें जाना  »  श्लोक d4
 
 
श्लोक  1.93.d4 
यज्ञवाटमटन्ती सा पुत्रांस्तानपराजितान्॥
पश्यन्ती यज्ञमाहात्म्यं मुदं लेभे च माधवी।
 
 
अनुवाद
माधवी बहुत प्रसन्न हुई जब उसने यज्ञ वेदी के चारों ओर भ्रमण किया, अपने अजेय पुत्रों को देखा और यज्ञ की महिमा का अनुभव किया।
 
Madhavi became very happy as she roamed around the sacrificial altar, saw her undefeated sons, and experienced the glory of the sacrifice.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)