श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 93: राजा ययातिका वसुमान् और शिबिके प्रतिग्रहको अस्वीकार करना तथा अष्टक आदि चारों राजाओंके साथ स्वर्गमें जाना  »  श्लोक d19
 
 
श्लोक  1.93.d19 
वैशम्पायन उवाच
एवमुक्त्वा ययातिस्तु पुन: प्रोवाच बुद्धिमान्।
सर्वे ह्यवभृथस्नातास्त्वरध्वं कार्यगौरवात्॥ )
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं- हे राजन! उपर्युक्त बात कहकर बुद्धिमान ययाति ने पुनः अपने पौत्रों से कहा- 'तुम सब लोग स्नान कर चुके हो। अब शीघ्रतापूर्वक आवश्यक कार्य की सफलता के लिए तैयार हो जाओ।'
 
Vaishampayana says- O King! After saying the above, the wise Yayati again said to his grandsons- 'All of you have taken the bath. Now get ready quickly for the success of the important task.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)