Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.93.d18: जो शुद्ध श्रोत्रिय ब्राह्मण उत्तम व्रत का पालन करता है, वही श्राद्ध के लिए सर्वोत्तम है। जब वह प्राप्त हो जाए, तो उसे श्राद्ध के लिए सर्वोत्तम समय समझना चाहिए। उसे दिया गया दान उत्तम काल का दान है। इसके अतिरिक्त कोई अन्य उपयुक्त समय नहीं है। | mahabharat अध्याय 1.93: राजा ययातिका वसुमान् और शिबिके प्रतिग्रहको अस्वीकार करना तथा अष्टक आदि चारों राजाओंके साथ स्वर्गमें जाना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
लब्ध्वा पात्रं तु विद्वांसं श्रोत्रियं सुव्रतं शुचिम्।
स काल: कालतो दत्तं नान्यथा काल इष्यते॥
अनुवाद
जो शुद्ध श्रोत्रिय ब्राह्मण उत्तम व्रत का पालन करता है, वही श्राद्ध के लिए सर्वोत्तम है। जब वह प्राप्त हो जाए, तो उसे श्राद्ध के लिए सर्वोत्तम समय समझना चाहिए। उसे दिया गया दान उत्तम काल का दान है। इसके अतिरिक्त कोई अन्य उपयुक्त समय नहीं है।
A pure Shrotri Brahmin who observes the best fast is the best person to perform Shraddha. When he is attained, that should be considered the best time for Shraddha. The donation given to him is the donation of the best time. There is no other suitable time apart from this.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥