Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.93.d14: अतः आज से पितृ कर्म (श्राद्ध) में दौहित्र को सर्वाधिक पवित्र माना जाएगा। इसमें कोई संदेह नहीं कि वह पितरों की प्रसन्नता में वृद्धि करेगा। | mahabharat अध्याय 1.93: राजा ययातिका वसुमान् और शिबिके प्रतिग्रहको अस्वीकार करना तथा अष्टक आदि चारों राजाओंके साथ स्वर्गमें जाना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तस्मात् पवित्रं दौहित्रमद्यप्रभृति पैतृके।
भविष्यति न संदेह: पितॄणां प्रीतिवर्धनम्॥
अनुवाद
अतः आज से पितृ कर्म (श्राद्ध) में दौहित्र को सर्वाधिक पवित्र माना जाएगा। इसमें कोई संदेह नहीं कि वह पितरों की प्रसन्नता में वृद्धि करेगा।
Therefore, from today onwards, Dauhitra will be considered most sacred in ancestral rituals (Shraddha). There is no doubt that he will increase the happiness of the ancestors.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥