श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 93: राजा ययातिका वसुमान् और शिबिके प्रतिग्रहको अस्वीकार करना तथा अष्टक आदि चारों राजाओंके साथ स्वर्गमें जाना  »  श्लोक d13
 
 
श्लोक  1.93.d13 
ययातिरुवाच
यदि धर्मफलं ह्येतच्छोभनं भविता तथा।
दुहित्रा चैव दौहित्रैस्तारितोऽहं महात्मभि:॥
 
 
अनुवाद
ययाति बोले- "यदि धर्म का यही फल है, तो इसका शुभ फल अवश्यंभावी है। आज मेरी पुत्री और मेरे प्रपौत्रों ने मुझे आशीर्वाद दिया है।"
 
Yayati said- If this is the fruit of Dharma, then its auspicious result is inevitable. Today my daughter and my great grandsons have blessed me.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)