Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.93.d10: वैशम्पायन कहते हैं- हे राजन! अपनी माता की यह बात सुनकर वसुमना ने कहा- हे माता! वह अपने पद से विमुख हो गया है। अपने पुत्र की यह बात सुनकर माधवी भ्रमित हो गई और अपने पौत्रों से घिरी हुई अपने पिता से बोली। | mahabharat अध्याय 1.93: राजा ययातिका वसुमान् और शिबिके प्रतिग्रहको अस्वीकार करना तथा अष्टक आदि चारों राजाओंके साथ स्वर्गमें जाना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायन कहते हैं- हे राजन! अपनी माता की यह बात सुनकर वसुमना ने कहा- हे माता! वह अपने पद से विमुख हो गया है। अपने पुत्र की यह बात सुनकर माधवी भ्रमित हो गई और अपने पौत्रों से घिरी हुई अपने पिता से बोली।
Vaishampayana says- O King! On hearing this from his mother, Vasumana said- Mother! He has been displaced from his position. On hearing this from her son, Madhavi became confused and spoke to her father surrounded by her grandsons.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥