Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.93.8: शिबि बोले - महाराज! यदि आप खरीदना नहीं चाहते, तो मेरे द्वारा स्वयं दिए गए पुण्य लोकों को स्वीकार कर लीजिए। मैं उन सबको देकर निश्चय ही उन लोकों में नहीं जाऊँगा। वे लोक ऐसे हैं, जहाँ धैर्यवान पुरुष कभी शोक नहीं करते। 8. | mahabharat अध्याय 1.93: राजा ययातिका वसुमान् और शिबिके प्रतिग्रहको अस्वीकार करना तथा अष्टक आदि चारों राजाओंके साथ स्वर्गमें जाना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शिबि बोले - महाराज! यदि आप खरीदना नहीं चाहते, तो मेरे द्वारा स्वयं दिए गए पुण्य लोकों को स्वीकार कर लीजिए। मैं उन सबको देकर निश्चय ही उन लोकों में नहीं जाऊँगा। वे लोक ऐसे हैं, जहाँ धैर्यवान पुरुष कभी शोक नहीं करते। 8.
Shibi said - Maharaj! If you do not want to buy, then accept the virtuous worlds offered by me myself. I will certainly not go to those worlds after giving them all. Those worlds are such, where the patient men never grieve. 8.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥