श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 93: राजा ययातिका वसुमान् और शिबिके प्रतिग्रहको अस्वीकार करना तथा अष्टक आदि चारों राजाओंके साथ स्वर्गमें जाना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.93.3 
वसुमानुवाच
तांस्ते ददानि मा प्रपत प्रपातं
ये मे लोकास्तव ते वै भवन्तु।
क्रीणीष्वैतांस्तृणकेनापि राजन्
प्रतिग्रहस्ते यदि धीमन् प्रदुष्ट:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
वसुमान बोले - हे राजन! मैं वे सब लोक तुम्हें देता हूँ, कृपया नीचे मत गिरो। जितने पुण्य लोक मेरे हैं, वे सब तुम्हारे हो जाएँ। हे ज्ञानी! यदि तुम्हें दान लेने में दोष लगता है, तो तुम मुझे एक मुट्ठी तिनका देकर मूल्य स्वरूप ये सब लोक मुझसे खरीद लो॥3॥
 
Vasuman said - O King! I give all those worlds to you, please do not fall down. All the virtuous worlds that belong to me, may they be yours. Wise man! If you find fault in accepting gifts, then give me a handful of straw as a price and buy all these worlds from me.॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)