Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.93.26: अष्टक! मैं यहाँ तुमसे, प्रतर्दन से तथा उषादश्व के पुत्र वसुमान से जो कुछ कहता हूँ, वह सब सत्य है। मुझे विश्वास है कि समस्त लोक, ऋषि और देवता सत्य से ही पूज्य हैं॥ 26॥ | mahabharat अध्याय 1.93: राजा ययातिका वसुमान् और शिबिके प्रतिग्रहको अस्वीकार करना तथा अष्टक आदि चारों राजाओंके साथ स्वर्गमें जाना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यदष्टक प्रब्रवीमीह सत्यं
प्रतर्दनं चौषदश्विं तथैव।
सर्वे च लोका मुनयश्च देवा:
सत्येन पूज्या इति मे मनोगतम्॥ २६॥
अनुवाद
अष्टक! मैं यहाँ तुमसे, प्रतर्दन से तथा उषादश्व के पुत्र वसुमान से जो कुछ कहता हूँ, वह सब सत्य है। मुझे विश्वास है कि समस्त लोक, ऋषि और देवता सत्य से ही पूज्य हैं॥ 26॥
Ashtak! Whatever I say here to you, to Pratardana and to Vasuman, the son of Ushadashwa, is all true. I am convinced that all the worlds, sages and gods are worshipable only through truth.॥ 26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥