Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.93.22: ययाति बोले- मैं नहुष का पुत्र और पुरु का पिता राजा ययाति हूँ। इस लोक में मैं सम्राट था। तुम सब मेरे ही लोग हो, इसलिए मैं यह रहस्य तुम्हें बता रहा हूँ। मैं तुम्हारा नाना हूँ। (यद्यपि मैंने यह बात पहले भी तुमसे कही है, फिर भी मैं इसे पुनः स्पष्ट कर रहा हूँ)॥ 22॥ | mahabharat अध्याय 1.93: राजा ययातिका वसुमान् और शिबिके प्रतिग्रहको अस्वीकार करना तथा अष्टक आदि चारों राजाओंके साथ स्वर्गमें जाना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ययाति बोले- मैं नहुष का पुत्र और पुरु का पिता राजा ययाति हूँ। इस लोक में मैं सम्राट था। तुम सब मेरे ही लोग हो, इसलिए मैं यह रहस्य तुम्हें बता रहा हूँ। मैं तुम्हारा नाना हूँ। (यद्यपि मैंने यह बात पहले भी तुमसे कही है, फिर भी मैं इसे पुनः स्पष्ट कर रहा हूँ)॥ 22॥
Yayati said- I am King Yayati, son of Nahush and father of Puru. In this world I was the emperor. All of you are my own people; hence I am revealing this secret to you. I am your maternal grandfather. (Although I have told you this earlier also, yet I am making it clear again)॥ 22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥