Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.93.19: नरेशवर! दान, तप, सत्य, धर्म, प्रेम, दया, क्षमा, मृदुता और व्रतों के पालन की इच्छा - ये सब गुण राजा शिबि में अद्वितीय हैं और बुद्धि में भी कोई उनकी बराबरी नहीं कर सकता ॥19॥   |   mahabharat अध्याय 1.93: राजा ययातिका वसुमान् और शिबिके प्रतिग्रहको अस्वीकार करना तथा अष्टक आदि चारों राजाओंके साथ स्वर्गमें जाना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 93: राजा ययातिका वसुमान् और शिबिके प्रतिग्रहको अस्वीकार करना तथा अष्टक आदि चारों राजाओंके साथ स्वर्गमें जाना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  1.93.19 
दानं तप: सत्यमथापि धर्मो
ह्री: श्री: क्षमा सौम्यमथो विधित्सा।
राजन्नेतान्यप्रमेयाणि राज्ञ:
शिबे: स्थितान्यप्रतिमस्य बुद्धॺा॥ १९॥
 
 
अनुवाद
नरेशवर! दान, तप, सत्य, धर्म, प्रेम, दया, क्षमा, मृदुता और व्रतों के पालन की इच्छा - ये सब गुण राजा शिबि में अद्वितीय हैं और बुद्धि में भी कोई उनकी बराबरी नहीं कर सकता ॥19॥
 
Nareshwar! Charity, austerity, truth, religion, love, kindness, forgiveness, gentleness and desire to observe fasts - all these qualities are unique in King Shibi and there is no one who can match him even in intelligence. 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)