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mahabharat 1.93.18: ययातिन ने कहा - राजन् ! उशीनर के पुत्र शिबि ने ब्रह्मलोक प्राप्ति के लिए अपना सर्वस्व दान कर दिया था, इसीलिए वे आप सबमें श्रेष्ठ हैं ॥18॥   |   mahabharat अध्याय 1.93: राजा ययातिका वसुमान् और शिबिके प्रतिग्रहको अस्वीकार करना तथा अष्टक आदि चारों राजाओंके साथ स्वर्गमें जाना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 93: राजा ययातिका वसुमान् और शिबिके प्रतिग्रहको अस्वीकार करना तथा अष्टक आदि चारों राजाओंके साथ स्वर्गमें जाना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.93.18 
ययातिरुवाच
अददद् देवयानाय यावद् वित्तमविन्दत।
उशीनरस्य पुत्रोऽयं तस्माच्छ्रेष्ठो हि व: शिबि:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
ययातिन ने कहा - राजन् ! उशीनर के पुत्र शिबि ने ब्रह्मलोक प्राप्ति के लिए अपना सर्वस्व दान कर दिया था, इसीलिए वे आप सबमें श्रेष्ठ हैं ॥18॥
 
Yayatin said – King! Ushinara's son Shibi had donated everything to attain the path to Brahmaloka, that is why he is the best among all of you. 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)