Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.93.17: अष्टक बोले - हे राजन! महात्मा इन्द्र मेरे परम मित्र हैं, इसलिए मैंने सोचा था कि मैं ही उनके पास पहले पहुँचूँगा। परन्तु ऐसा कैसे हुआ कि उशीनरपुत्र शिबि ही हमारे समस्त वाहनों को लाँघकर पूरे वेग से आगे बढ़ गए?॥ 17॥ | mahabharat अध्याय 1.93: राजा ययातिका वसुमान् और शिबिके प्रतिग्रहको अस्वीकार करना तथा अष्टक आदि चारों राजाओंके साथ स्वर्गमें जाना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अष्टक बोले - हे राजन! महात्मा इन्द्र मेरे परम मित्र हैं, इसलिए मैंने सोचा था कि मैं ही उनके पास पहले पहुँचूँगा। परन्तु ऐसा कैसे हुआ कि उशीनरपुत्र शिबि ही हमारे समस्त वाहनों को लाँघकर पूरे वेग से आगे बढ़ गए?॥ 17॥
Ashtak said - O King! Mahatma Indra is my great friend, therefore I thought that I alone would reach him first. But how did this happen that Ushinarputra Shibi alone went ahead with full speed, crossing all our vehicles?॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥