श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 93: राजा ययातिका वसुमान् और शिबिके प्रतिग्रहको अस्वीकार करना तथा अष्टक आदि चारों राजाओंके साथ स्वर्गमें जाना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.93.16 
वैशम्पायन उवाच
तेऽधिरुह्य रथान् सर्वे प्रयाता नृपसत्तमा:।
आक्रमन्तो दिवं भाभिर्धर्मेणावृत्य रोदसी॥ १६॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - राजन ! तत्पश्चात् वे सभी मनुष्य उन दिव्य रथों पर आरूढ़ होकर धर्म के बल से स्वर्गलोक को जाने के लिए चल पड़े । उस समय उनका तेज पृथ्वी और आकाश में फैल रहा था ॥16॥
 
Vaishampayanji says- Rajan! Thereafter, all those mortals mounted on those divine chariots set out to reach heaven on the strength of religion. At that time his light was spreading across the earth and sky. 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)