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mahabharat 1.93.13: ययाति बोले - ऊपर आकाश में जलती हुई अग्नि की लपटों के समान चमकने वाले जो पाँच स्वर्णमय रथ हैं, वे तुम्हें स्वर्ग ले जाएँगे ॥13॥   |   mahabharat अध्याय 1.93: राजा ययातिका वसुमान् और शिबिके प्रतिग्रहको अस्वीकार करना तथा अष्टक आदि चारों राजाओंके साथ स्वर्गमें जाना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 93: राजा ययातिका वसुमान् और शिबिके प्रतिग्रहको अस्वीकार करना तथा अष्टक आदि चारों राजाओंके साथ स्वर्गमें जाना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.93.13 
ययातिरुवाच
युष्मानेते वहिष्यन्ति रथा: पञ्च हिरण्मया:।
उच्चै: सन्त: प्रकाशन्ते ज्वलन्तोऽग्निशिखा इव॥ १३॥
 
 
अनुवाद
ययाति बोले - ऊपर आकाश में जलती हुई अग्नि की लपटों के समान चमकने वाले जो पाँच स्वर्णमय रथ हैं, वे तुम्हें स्वर्ग ले जाएँगे ॥13॥
 
Yayati said – The five golden chariots which are shining like the flames of burning fire in the sky above, will take you to heaven. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)