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mahabharat 1.93.12: अष्टक बोले - आकाश में ये पाँच सुवर्णमय रथ किसके हैं, जिन पर सवार होकर मनुष्य अनन्त लोकों में जाना चाहता है? ॥12॥   |   mahabharat अध्याय 1.93: राजा ययातिका वसुमान् और शिबिके प्रतिग्रहको अस्वीकार करना तथा अष्टक आदि चारों राजाओंके साथ स्वर्गमें जाना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 93: राजा ययातिका वसुमान् और शिबिके प्रतिग्रहको अस्वीकार करना तथा अष्टक आदि चारों राजाओंके साथ स्वर्गमें जाना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  1.93.12 
अष्टक उवाच
कस्यैते प्रतिदृश्यन्ते रथा: पञ्च हिरण्मया:।
यानारुह्य नरो लोकानभिवाञ्छति शाश्वतान्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
अष्टक बोले - आकाश में ये पाँच सुवर्णमय रथ किसके हैं, जिन पर सवार होकर मनुष्य अनन्त लोकों में जाना चाहता है? ॥12॥
 
Ashtak said - Whose five golden chariots are these seen in the sky, riding on which a man wishes to go to the eternal worlds? ॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)