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mahabharat 1.93.11: ययाति बोले, "जिस काम के मैं योग्य हूँ, उसके लिए प्रयत्न करो, क्योंकि पुण्यात्मा पुरुष सत्य की ही प्रशंसा करते हैं। जो काम मैंने पहले न किया हो, उसे मैं अब भी करने योग्य नहीं समझता।"   |   mahabharat अध्याय 1.93: राजा ययातिका वसुमान् और शिबिके प्रतिग्रहको अस्वीकार करना तथा अष्टक आदि चारों राजाओंके साथ स्वर्गमें जाना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 93: राजा ययातिका वसुमान् और शिबिके प्रतिग्रहको अस्वीकार करना तथा अष्टक आदि चारों राजाओंके साथ स्वर्गमें जाना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.93.11 
ययातिरुवाच
यदर्होऽहं तद् यतध्वं सन्त: सत्याभिनन्दिन:।
अहं तन्नाभिजानामि यत् कृतं न मया पुरा॥ ११॥
 
 
अनुवाद
ययाति बोले, "जिस काम के मैं योग्य हूँ, उसके लिए प्रयत्न करो, क्योंकि पुण्यात्मा पुरुष सत्य की ही प्रशंसा करते हैं। जो काम मैंने पहले न किया हो, उसे मैं अब भी करने योग्य नहीं समझता।"
 
Yayati said, "Make efforts for that which I am worthy of, because the virtuous men praise only the truth. I do not consider it worthy to do even now that I did not do it in the past."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)