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mahabharat 1.93.10: अष्टक बोले - हे राजन! यदि आप हम सबके द्वारा दिए गए लोकों को प्रसन्नतापूर्वक स्वीकार न करें, तो हम सब अपने-अपने पुण्य लोक आपको अर्पित करके नरक (पृथ्वी) में जाने को तैयार हैं॥ 10॥   |   mahabharat अध्याय 1.93: राजा ययातिका वसुमान् और शिबिके प्रतिग्रहको अस्वीकार करना तथा अष्टक आदि चारों राजाओंके साथ स्वर्गमें जाना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 93: राजा ययातिका वसुमान् और शिबिके प्रतिग्रहको अस्वीकार करना तथा अष्टक आदि चारों राजाओंके साथ स्वर्गमें जाना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.93.10 
अष्टक उवाच
न चेदेकैकशो राजँल्लोकान् न: प्रतिनन्दसि।
सर्वे प्रदाय भवते गन्तारो नरकं वयम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
अष्टक बोले - हे राजन! यदि आप हम सबके द्वारा दिए गए लोकों को प्रसन्नतापूर्वक स्वीकार न करें, तो हम सब अपने-अपने पुण्य लोक आपको अर्पित करके नरक (पृथ्वी) में जाने को तैयार हैं॥ 10॥
 
Ashtak said - O King! If you do not happily accept the worlds offered by each one of us, then we all are ready to offer our virtuous worlds to you and go to hell (earth).॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)