Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.92.d1-19: जो शुभ कर्म करना चाहता है, वह ऐसा कोई कार्य नहीं कर सकता जो अन्य राजाओं ने न किया हो। जो राजा धर्म और अधर्म का भेद भली-भाँति समझकर कर्तव्य-अकर्तव्य के विषय में सावधानी से आचरण करता है, वह बुद्धिमान, सत्यवादी और ज्ञानी होता है। वह अपने तेज से जगत का रक्षक होता है। जब धर्म-कर्म में संदेह हो अथवा जहाँ न्यायपूर्वक कामना और धन दोनों की प्राप्ति हो रही हो, वहाँ पहले धर्म-कर्म करना चाहिए, न कि धन और कामना की प्राप्ति। यही धर्म है। महाबली राजा वसुमान ने राजा ययाति से, जो ऐसी बातें कह रहे थे, यह कहा। | mahabharat अध्याय 1.92: अष्टक-ययाति-संवाद और ययातिद्वारा दूसरोंके दिये हुए पुण्यदानको अस्वीकार करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कुर्यादपूर्वं न कृतं यदन्यै-
र्विधित्समान: किमु तत्र साधु।
(धर्माधर्मौ सुविनिश्चित्य सम्यक्
कार्याकार्येष्वप्रमत्तश्चरेद् य:।
स वै धीमान् सत्यसन्ध: कृतात्मा
राजा भवेल्लोकपालो महिम्ना॥
यदा भवेत् संशयो धर्मकार्ये
कामार्थे वा यत्र विन्दन्ति सम्यक्।
कार्यं तत्र प्रथमं धर्मकार्यं
न तौ कुर्यादर्थकामौ स धर्म:॥ )
ब्रुवाणमेनं नृपतिं ययातिं
नृपोत्तमो वसुमानब्रवीत् तम्॥ १९॥
अनुवाद
जो शुभ कर्म करना चाहता है, वह ऐसा कोई कार्य नहीं कर सकता जो अन्य राजाओं ने न किया हो। जो राजा धर्म और अधर्म का भेद भली-भाँति समझकर कर्तव्य-अकर्तव्य के विषय में सावधानी से आचरण करता है, वह बुद्धिमान, सत्यवादी और ज्ञानी होता है। वह अपने तेज से जगत का रक्षक होता है। जब धर्म-कर्म में संदेह हो अथवा जहाँ न्यायपूर्वक कामना और धन दोनों की प्राप्ति हो रही हो, वहाँ पहले धर्म-कर्म करना चाहिए, न कि धन और कामना की प्राप्ति। यही धर्म है। महाबली राजा वसुमान ने राजा ययाति से, जो ऐसी बातें कह रहे थे, यह कहा।
He who wishes to perform auspicious deeds cannot do such a thing which has not been done by other kings. The king who, having well decided the difference between Dharma and Adharma, moves about cautiously in matters of duty and non-duty, is wise, truthful and wise. He becomes the protector of the world by his glory. When there is doubt in the Dharma work or where, in a just manner, desire and wealth both are attained, then the Dharma work should be performed first, not wealth and desire. This is Dharma. The great king Vasuman spoke to King Yayati who was saying such things. 19.
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि सम्भवपर्वणि उत्तरयायाते द्विनवतितमोऽध्याय:॥ ९२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत सम्भवपर्वमें उत्तरयायातविषयक बानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ९२॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके २ श्लोक मिलाकर कुल २१ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥