Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.92.7: ययाति ने कहा, "मैं अपने पुण्यों के क्षीण हो जाने के कारण आकाश से गिरकर भौम नामक नरक में जा रहा हूँ। ब्रह्माजी के लोकपाल मेरे पतन में शीघ्रता कर रहे हैं; अतः आप सब से आज्ञा लेकर मैं इस पृथ्वी पर गिरूँगा।" | mahabharat अध्याय 1.92: अष्टक-ययाति-संवाद और ययातिद्वारा दूसरोंके दिये हुए पुण्यदानको अस्वीकार करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ययाति ने कहा, "मैं अपने पुण्यों के क्षीण हो जाने के कारण आकाश से गिरकर भौम नामक नरक में जा रहा हूँ। ब्रह्माजी के लोकपाल मेरे पतन में शीघ्रता कर रहे हैं; अतः आप सब से आज्ञा लेकर मैं इस पृथ्वी पर गिरूँगा।"
Yayati said, "Due to the exhaustion of my merits, I am falling from the sky to enter the hell called Bhauma. The protectors of the world of Brahmaji are hastening my fall; therefore, after asking all of you and taking leave, I shall fall on this earth." 7.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥