Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.92.4: तथापि, जो मनुष्य पापकर्मों से सदैव भयभीत रहता है और अपने धर्मानुसार आचरण करता है, वह सहज ही मोक्ष को प्राप्त कर लेता है, जो परम सुखरूप है ॥4॥ | mahabharat अध्याय 1.92: अष्टक-ययाति-संवाद और ययातिद्वारा दूसरोंके दिये हुए पुण्यदानको अस्वीकार करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तथापि, जो मनुष्य पापकर्मों से सदैव भयभीत रहता है और अपने धर्मानुसार आचरण करता है, वह सहज ही मोक्ष को प्राप्त कर लेता है, जो परम सुखरूप है ॥4॥
However, a person who is always fearful of sinful acts and follows his religious principles, easily attains salvation which is a form of ultimate happiness. ॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥