Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.92.2: ययाति ने कहा: भले ही वह कामी गृहस्थों के बीच गाँव में रहता हो, लेकिन जो संयमी और गृहरहित तपस्वी है, वह दो प्रकार के मुनियों में से ब्रह्म को प्राप्त करने वाला प्रथम है।   |   mahabharat अध्याय 1.92: अष्टक-ययाति-संवाद और ययातिद्वारा दूसरोंके दिये हुए पुण्यदानको अस्वीकार करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 92: अष्टक-ययाति-संवाद और ययातिद्वारा दूसरोंके दिये हुए पुण्यदानको अस्वीकार करना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.92.2 
ययातिरुवाच
अनिकेतो गृहस्थेषु कामवृत्तेषु संयत:।
ग्राम एव वसन् भिक्षुस्तयो: पूर्वतरं गत:॥ २॥
 
 
अनुवाद
ययाति ने कहा: भले ही वह कामी गृहस्थों के बीच गाँव में रहता हो, लेकिन जो संयमी और गृहरहित तपस्वी है, वह दो प्रकार के मुनियों में से ब्रह्म को प्राप्त करने वाला प्रथम है।
 
Yayati said: Even though he lives in a village among lustful householders, he who is a self-controlled and homeless ascetic is the first among the two kinds of sages to attain Brahman. 2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)