Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.92.18: धर्म पर दृष्टि रखने वाले राजा के लिए उचित है कि वह पूरी चेष्टा से धर्म और यश के मार्ग पर चले। मुझ जैसे धर्म में मन लगाने वाले पुरुष को जान-बूझकर ऐसा नीच कर्म नहीं करना चाहिए, जिसे करने के लिए आप मुझसे कह रहे हैं।॥18॥ | mahabharat अध्याय 1.92: अष्टक-ययाति-संवाद और ययातिद्वारा दूसरोंके दिये हुए पुण्यदानको अस्वीकार करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
धर्म पर दृष्टि रखने वाले राजा के लिए उचित है कि वह पूरी चेष्टा से धर्म और यश के मार्ग पर चले। मुझ जैसे धर्म में मन लगाने वाले पुरुष को जान-बूझकर ऐसा नीच कर्म नहीं करना चाहिए, जिसे करने के लिए आप मुझसे कह रहे हैं।॥18॥
It is appropriate for a king who has an eye on Dharma to follow the path of Dharma and fame with all his efforts. A person like me whose mind is focused on Dharma should not knowingly do such a pathetic act that you are asking me to do.॥ 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥