Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.92.13: जो ब्राह्मण नहीं है, उसे कभी भी दरिद्र भिखारी बनकर जीवन व्यतीत नहीं करना चाहिए। भिक्षा उस विद्वान ब्राह्मण की पत्नी है जो अपने ज्ञान से संसार को जीत लेता है। केवल ब्रह्म को जानने वाला ब्राह्मण ही भिक्षा मांगने का अधिकारी है। मैं अच्छे कर्म करना चाहता हूँ; अतः जो मैंने पहले कभी नहीं किया, उसे मैं कैसे कर सकता हूँ? ॥13॥ | mahabharat अध्याय 1.92: अष्टक-ययाति-संवाद और ययातिद्वारा दूसरोंके दिये हुए पुण्यदानको अस्वीकार करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो ब्राह्मण नहीं है, उसे कभी भी दरिद्र भिखारी बनकर जीवन व्यतीत नहीं करना चाहिए। भिक्षा उस विद्वान ब्राह्मण की पत्नी है जो अपने ज्ञान से संसार को जीत लेता है। केवल ब्रह्म को जानने वाला ब्राह्मण ही भिक्षा मांगने का अधिकारी है। मैं अच्छे कर्म करना चाहता हूँ; अतः जो मैंने पहले कभी नहीं किया, उसे मैं कैसे कर सकता हूँ? ॥13॥
One who is not a Brahmin should never spend his life as a poor beggar. Begging is the wife of a learned Brahmin who conquers the world with his knowledge. Only a Brahmin who knows Brahman has the right to beg. I want to do good deeds; therefore, how can I do something that I have never done before? ॥13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥