Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.92.10: ययाति बोले - हे नरेन्द्रसिंह! इस पृथ्वी पर जितने गाय, घोड़े आदि तथा जंगली और पहाड़ी पशु हैं, उतने ही तुम्हारे लिए स्वर्ग में भी लोक हैं। यह तुम निश्चयपूर्वक जान सकते हो॥10॥ | mahabharat अध्याय 1.92: अष्टक-ययाति-संवाद और ययातिद्वारा दूसरोंके दिये हुए पुण्यदानको अस्वीकार करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ययातिरुवाच
यावत् पृथिव्यां विहितं गवाश्वं
सहारण्यै: पशुभि: पार्वतैश्च।
तावल्लोका दिवि ते संस्थिता वै
तथा विजानीहि नरेन्द्रसिंह॥ १०॥
अनुवाद
ययाति बोले - हे नरेन्द्रसिंह! इस पृथ्वी पर जितने गाय, घोड़े आदि तथा जंगली और पहाड़ी पशु हैं, उतने ही तुम्हारे लिए स्वर्ग में भी लोक हैं। यह तुम निश्चयपूर्वक जान सकते हो॥10॥
Yayati said, O Narendrasingh! There are as many worlds in heaven for you as there are cows, horses, etc. on this earth, along with wild and mountain animals. You can know this for sure.॥10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥