ययातिरुवाच
अरण्ये वसतो यस्य ग्रामो भवति पृष्ठत:।
ग्रामे वा वसतोऽरण्यं स मुनि: स्याज्जनाधिप॥ ९॥
अनुवाद
ययातिन ने कहा- जनेश्वर! वन में रहते हुए जिसके लिए ग्राम गौण है और ग्राम में रहते हुए जिसके लिए वन गौण है, उसे मुनि कहते हैं॥9॥
Yayatin said – Janeshwar! The one for whom the village is second while living in the forest and the one for whom the forest is second while living in the village is called a sage. 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥