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श्री महाभारत
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पर्व 1: आदि पर्व
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अध्याय 91: ययाति और अष्टकका आश्रमधर्मसम्बन्धी संवाद
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श्लोक 8
श्लोक
1.91.8
अष्टक उवाच
कतिस्विदेव मुनय: कति मौनानि चाप्युत।
भवन्तीति तदाचक्ष्व श्रोतुमिच्छामहे वयम्॥ ८॥
अनुवाद
अष्टक ने पूछा - राजन् ! मुनि कितने हैं ? और मौन कितने प्रकार का होता है ? हमें बताइए, हम सुनना चाहते हैं ॥8॥
Ashtak asked - King! How many sages are there? And how many types of silence are there? Tell us, we want to hear it. ॥ 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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