Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.91.7: जो वनवासी मुनि अपने पाँच तत्त्वों से बने शरीर को वन में ही त्याग देता है, वह अपने पूर्व और पश्चात की दस पीढ़ियों के जाति-बंधुओं को तथा स्वयं इक्कीसवीं पीढ़ी को भी पुण्य लोकों में भेज देता है ॥7॥ | mahabharat अध्याय 1.91: ययाति और अष्टकका आश्रमधर्मसम्बन्धी संवाद । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो वनवासी मुनि अपने पाँच तत्त्वों से बने शरीर को वन में ही त्याग देता है, वह अपने पूर्व और पश्चात की दस पीढ़ियों के जाति-बंधुओं को तथा स्वयं इक्कीसवीं पीढ़ी को भी पुण्य लोकों में भेज देता है ॥7॥
A forest-dwelling sage who abandons his body made up of five elements in the forest itself, sends his caste-brethren of the ten generations before and after, as well as himself in the twenty-first generation, to the virtuous worlds. ॥ 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥