Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.91.6: जब सौन्दर्य, सुख आदि तुच्छ प्रतीत होने लगें और इच्छानुसार जीते जा सकें तथा उनके त्याग में ही सुख हो, तब उसी समय विद्वान पुरुष को चाहिए कि मन को वश में करके सम्पूर्ण सम्पत्ति का त्याग करके वन में रहने का प्रयत्न करे ॥6॥ | mahabharat अध्याय 1.91: ययाति और अष्टकका आश्रमधर्मसम्बन्धी संवाद । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जब सौन्दर्य, सुख आदि तुच्छ प्रतीत होने लगें और इच्छानुसार जीते जा सकें तथा उनके त्याग में ही सुख हो, तब उसी समय विद्वान पुरुष को चाहिए कि मन को वश में करके सम्पूर्ण सम्पत्ति का त्याग करके वन में रहने का प्रयत्न करे ॥6॥
When beauty, pleasure, etc. seem trivial and can be conquered according to one's will and happiness is found only in their renunciation, then at that very time a learned man, by controlling his mind, should renounce all possessions and try to live in a forest. ॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥