Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.90.5: अतः हे नरेन्द्र! इस संसार में जो भी बुरा या निन्दनीय कर्म है, उसे सर्वथा त्याग देना चाहिए। राजन्! मैंने आपसे सब कुछ कह दिया, अब आप बताइए, अब मैं आपसे और क्या कहूँ?॥5॥ | mahabharat अध्याय 1.90: अष्टक और ययातिका संवाद । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तस्मादेतद् वर्जनीयं नरेन्द्र
दुष्टं लोके गर्हणीयं च कर्म।
आख्यातं ते पार्थिव सर्वमेव
भूयश्चेदानीं वद किं ते वदामि॥ ५॥
अनुवाद
अतः हे नरेन्द्र! इस संसार में जो भी बुरा या निन्दनीय कर्म है, उसे सर्वथा त्याग देना चाहिए। राजन्! मैंने आपसे सब कुछ कह दिया, अब आप बताइए, अब मैं आपसे और क्या कहूँ?॥5॥
Therefore, O Narendra! Any evil or condemnable act in this world should be completely abandoned. King! I have told you everything, tell me, what else should I tell you?॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥