श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 90: अष्टक और ययातिका संवाद  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.90.4 
ययातिरुवाच
इमं भौमं नरकं ते पतन्ति
लालप्यमाना नरदेव सर्वे।
ते कङ्कगोमायुबलाशनार्थे*
क्षीणा विवृद्धिं बहुधा व्रजन्ति॥ ४॥
 
 
अनुवाद
ययाति बोले - नरदेव! जो लोग अपने मुख से अपने पुण्यों का बखान करते हैं, वे सब इस पार्थिव नरक में गिरते हैं। यहाँ वे गीध, सियार और कौए आदि के खाने योग्य शरीर पाने के लिए बहुत परिश्रम करके क्षीण हो जाते हैं और प्रायः पुत्र-पौत्रों के रूप में विस्तृत होते हैं। 4॥
 
Yayati said – Nardev! All those who proclaim their virtuous deeds through their mouths fall into this earthly hell. Here they become emaciated after doing a lot of hard work to get a body that is edible for vultures, jackals and crows etc. and are often expanded in the form of sons and grandchildren. 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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