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mahabharat 1.90.27: जो सबका आश्रय है, सनातन है और जहाँ मन की गति भी रुक जाती है, वह (परम ब्रह्म परमात्मा) तुम सबका कल्याण करने वाला है। जो ज्ञानीजन उसे जानते हैं, वे उस परम ब्रह्म परमात्मा से युक्त होकर इस लोक और परलोक में परम शांति को प्राप्त होते हैं॥ 27॥   |   mahabharat अध्याय 1.90: अष्टक और ययातिका संवाद   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 90: अष्टक और ययातिका संवाद  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  1.90.27 
ये चाश्रयं वेदयन्ते पुराणं
मनीषिणो मानसमार्गरुद्धम्।
तद्व: श्रेयस्तेन संयोगमेत्य
परां शान्तिं प्राप्नुयु: प्रेत्य चेह॥ २७॥
 
 
अनुवाद
जो सबका आश्रय है, सनातन है और जहाँ मन की गति भी रुक जाती है, वह (परम ब्रह्म परमात्मा) तुम सबका कल्याण करने वाला है। जो ज्ञानीजन उसे जानते हैं, वे उस परम ब्रह्म परमात्मा से युक्त होकर इस लोक और परलोक में परम शांति को प्राप्त होते हैं॥ 27॥
 
He who is the shelter of all, is eternal and where even the movement of the mind stops, he (Param Brahma Parmatma) is beneficial for all of you. The learned who know him, by uniting with that Param Brahma Parmatma, attain the ultimate peace in this world and the other world.॥ 27॥
 
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि सम्भवपर्वणि उत्तरयायाते नवतितमोऽध्याय:॥ ९०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत सम्भवपर्वमें उत्तरयायातविषयक नब्बेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ९०॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)